Are we alone in this universe ?

Are we alone in this universe : वैज्ञानिकों ने हाल ही मैं AI की मदद अंतरिक्ष में जीवन खोजने में ली । यह बहुत बड़ा सवाल है कि ब्रह्मांड में हमारे अलावा कोई ओर लाइफ है या फिर हम अकेले है । या हमसे विकसित सभ्यता पहले से इस ब्रह्माण्ड में है जो हमसे भी बेहतर एआई का प्रयोग कर रही है ये सारे सवाल काफी रोचक है । आज हम इन सभी सवालों के जवाब देंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे जीवन ढूंढने में मदद करेगी ।

पिछले कुछ सालों में एआई का विकास अचानक से तेज हुआ है अब एआई जीवन की तलाश भी करेगा अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक सिस्टम तैयार किया है जिसमे एआई ब्रह्मांड में जीवन की तलाश करेगा । इस सिस्टम में AI किसी इंसान जैसे दिखने वाले या जिनकी दो आंखे हो और वह हरे हो ऐसे एलियन की खोज नही करेगा । यह AI दूसरे ग्रहों पर क्लिक molecular biosignatures की तलाश करेगा । जिसकी मदद से यह पता चलेगा कि उस ग्रह में जीवन है या नही ।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिस्टम 90% सटीकता के साथ जीवन की खोज करेगा । और बताएगा की जीवन है या नही । हमारे पूरे को अच्छे से पढ़े हम आपको बताएंगे की यह सिस्टम कैसे काम करता है ।

Are we alone in this universe ? ( क्या ब्रह्मांड में हम अकेले है ? )

इंसान काफी समय से दूसरे ग्रहों में जीवन की बात कर रहा है उसने कई ग्रहों पर जीवन की खोज भी की है और साथ ही ऐसे कई ग्रह खोजे जो जीवन के लिए उपयुक्त है । पर अभी तक कोई ऐसा जीव नही मिला जिसके दो पैर या आंख हो जो सोचता हो । अब धीरे धीरे एआई भी इस क्षेत्र में मदद करके हमारे ब्रह्मांड में जीवन खोजने की खोज को तेज करेगा ।

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अमेरिका के वैज्ञानिकों ने ल्योन में गोल्डस्मिड्ट जियोकेमिस्ट्री सम्मेलन में अपनी रिसर्च को प्रस्तुत किया की कैसे AI जीवन खोजने में मदद करेगा । इन्होंने बताया कि जैव रासायनिक संकेतो को पहचान कर AI यह बताएगा की उस ग्रह में जीवन है या नही । हम किसी ग्रह में मूवी में दिखने वाले alian की बात नही कर रहे । यहां पर जीवन के लक्षण सूक्ष्म स्तर पर देख कर बताएंगे कि उस ग्रह में जीवन है या नही ।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे ब्रह्मांड में जीवन की खोज करेगा ?

आपको पता है अगर सही केमिकल का प्रयोग किया जाएगा उनको आपस में मिलाया जाए तो अमीनो अम्ल जैसे जटिल अणु प्राप्त होते है । आप जानते ही है जिस चीज में जीवन होता है उसका एक DNA होता है और यह DNA कुछ न्यूक्लियोटाइड से मिल कर बना होता है । इसलिए एआई कुछ खास केमिकल का प्रयोग कर इन न्यूक्लियोटाइड की खोज करेगा जिससे यह पता चलेगा कि उस ग्रह में जीवन है या नही है ।

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जब हम किसी ग्रह में रोवर भेजने तो उसमे ऐसे सेंसर का प्रयोग करेंगे जो AI based होगा फिर वह उस ग्रह का नमूना लेगा और कुछ केमिकल मिलाकर उसमे परमाणु के स्तर पर biosignatures का पता लगाएगा यह काफी जटिल प्रोसेस होता है । इसकी सटीकता करीब 90% के आस पास है । इससे प्राप्त डाटा को धरती पर भेज कर एआई उसके और भी पहलू की खोज करेगा ।

Are we alone in this universe

पर समस्या यह है हमे कैसे पता चलेगा की यह जीवन के अणु है हो सकता है समय के साथ साथ उसमे केमिकल बदलाव हुए हो और वह ऐसे बन गए हमे नही पता चल पाएगा की पहले जीवन था या नही।

ब्रह्मांड में जीवन पता करने की प्रक्रिया 

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने pyrolysis gas-chromatography mass-spectrometry methods (GCMS)  का प्रयोग जीवन की खोज करने में किया है । इसमें कार्बन से बने तत्व या नमूनों पर अनुसंधान किया जाता है । यह नमूने living cell , जीवाश्म ईधन , age-degraded samples या कोई भी कार्बन से बने हुए उल्का पिंड इसके साथ प्रयोगशाला में उपयोग किए गए संश्लेषित कार्बनिक यौगिकों और मिश्रणों आदि है ।

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साधारण शब्दों में कहें तो या तो हम किसी उल्का पिंड या रोवर द्वारा लाई गई मिट्टी की जांच करके जीवन का पता अणु के स्तर पर जाकर करेंगे ।

जब एआई की मदद लेकर जीवन की खोज शुरू करने का प्रोजेक्ट शुरू किया था तब  59 नमूने जैविक थे और 74 नमूने अजैविक थे जैविक नमूनों में दाल , चावल , गेहूं , मानव कोशिका , जीवाश्म तेल आदि और अजैविक नमूनो में उल्का पिंड आदि थे । इन नमूनों को पायरोलिसिस विधि का प्रयोग कर बिना ऑक्सीजन वाले वातावरण में रखा ताकि यह नमूने टूट सके उसके बाद GCMS विधि का प्रयोग किया गया यह मिश्रण को उसके घटकों में तोड़ता है और जांच करता है ।

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इसके बाद इन नमूनों का 3 D मॉडल तैयार किया गया और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस को सिखाया गया की इसकी जांच कैसे करते है । कि कैसे time , mass , volume , molecules आदि की मदद से जीवन की खोज की जाती है इसके लिए मशीन लर्निंग का प्रयोग किया गया ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसको अच्छे से सीख ले । यह डाटा की जांच 90% सटीकता के साथ करता है ।

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AI कैसे पता करेगा कि ब्रह्मांड में जीवन है या नही ?

सबसे पहले हमको उल्का पिंड और मंगल ग्रह के नमूनों पर जांच करनी चाहिए ताकि हमें यह पता चल सके कि यहां पहले जीवन था या नही अगर इसकी जांच से पता चला की यहां पहले जीवन था तो इनके नमूनों में जीवन के अणु अभी भी होंगे जिनको कई केमिकल का प्रयोग कर निकाला जाएगा । यह काफी जटिल प्रोसेस है जिसमे अणु स्तर पर कार्य किया जाता है ।

जीवन की खोज करने के लिए जैव रासायनिक मैथड सबसे बेहतर है यह परमाणु स्तर पर जांच करके आपको सही डाटा प्रदान करता है ।

Are we alone in this universe

निष्कर्ष ( conclusion )

आने वाले समय में यह देखना काफी रोचक होगा कि AI किस किस ग्रह में जीवन की खोज करता है और कैसे इससे हमारे विचार में दूसरे ग्रह के जीवन की सोच बदलती है । हो सकता है AI हमे बताए की पहले की सभ्यता हमसे ज्यादा विकसित थी । पर जो भी हो कभी न कभी एक समय हमे जीवन के और भी लक्षण जरूर प्राप्त होंगे ।

आप nasa की वेबसाइट पर जाकर दूसरे ग्रह के नमूने और जीवन के बारे में देख सकते है –

https://www.nasa.gov/

 

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